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अठ्ठनी,चव्वनि, और रुपया बना शराब ,घर -घर पहुँच रहा और लड़ रहा जाम

अठ्ठनी,चव्वनि, और रुपया बना शराब ,घर -घर पहुँच रहा और लड़ रहा जाम 

किशोर चौहान,बिहटा,( पटना)।बिहार में पूर्ण शराब बंदी के बाद तस्करों और पीने वाले नये-नये तरीका और कोड का ईजाद कर कर रहे है।अब अठ्ठनी,चव्वनि,और रुपया के नाम पर यह बिकने लगी है ।पीने वाले मोबाइल पर तस्करों से इसी नाम से इसे मंगाना शुरू किये है ।अठ्ठनी का मतलब आधा और चव्वनि का मतलब पौवा तथा रुपया मांगने पर एक बोतल शराब उपलब्ध हो जा रहा है।सूबे में यह धंधा तू डाल-डाल और मैं पात-पात के तर्ज पर चल रहा है ।जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण रोज-रोज देखने को मिल रहा है।प्रति दिन शराब और शराबी पकड़े जा रहे है।कड़े कानून और पकड़े जाने के भय से शरीफ और इज्जतदारों को यह सहज में होम डिलीवरी के माध्यम से उपल्बध हो जा रहा है।ऐसे लोग इसका सेवन चोरी-चोरी और थोड़ी -थोड़ी पीकर मदमदस्त हो रहे है।लेकिन जो समर्थवान नही है ,वे देशी के चक्कर मे कही न कही पकड़े जा रहे हैं।बिहार में कुटीर उधोग का रूप के विख्यात देशी शराब बनाने का धंधा पर काफी हद तो लगाम लगा है।लेकिन नदियों के तराई वाले इलाकों में यह कारोबार अभी पूरी तरह बंद नही हुआ है।इसके साथ -साथ ग्रामीण इलाके के कुछ दलित टोलों में महुआ और माड़ी का दारू अभी भी बन रहे है।इसी क्रम में बिहटा पुलिस ने सोन नदी के परेव से टायर के ट्यूब और बोरे में छिपाकर ले जाया जा रहा करीब 160 लीटर देसी दारू के साथ 3तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।उसके एक दिन पहले बिहटा में एक घर पुलिस ने ग्राहक बनकर फ्रूटी के पाउच मे भरकर रखा गया45 बोतल टेट्रा पैग शराब के साथ एक तस्कर को पकड़ा है।इस तरह के उदाहरण सूबे के कोने-कोने में प्रति दिन दर्जनों की संख्या में देखने को मिल रहा है।

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