Editor Login

अभयानंद के समय सरकार मंजूरी देती तो कई आईएएस भ्रष्टाचार में जाते जेल !

अभयानंद के समय सरकार मंजूरी देती तो कई आईएएस भ्रष्टाचार में जाते जेल !

>> आईएएस लॉबी के आगे सरकार हो गयी थी नतमस्तक, सरकार गिरने तक की हो गयी थी खतरा
>> भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हैं व्यवस्था ,जीरो टॉलरेंस बना प्रासंगिक

रवीश कुमार मणि

पटना ( अ सं ) । मुजफ्फरपुर के एसएसपी विवेक कुमार के कई ठिकाने पर स्पेशल विजलेंस यूनिट की रेड की कहानी में क्या खास आता हैं ।सभी के लिए दिलचस्पी बनी हुई हैं । बिहार में ब्यूरोक्रेट द्वारा भ्रष्टाचार का यह कोई पहला खेल नहीं हैं बल्कि ,इससे पहले बहुचर्चित चारा घोटाला ,अलकतरा घोटाला ,वर्दी घोटाला ,सृजन घोटाला ,एसएससी घोटाला ,मेघा घोटाला ,बाढ़ घोटाला ,शौचालय घोटाला हो चुकी हैं और ब्यरोक्रेट का चरित्र और चेहरा उजागर हुआ हैं । अपवाद ,कई जेल गये ,कई को सजा हुआ ।लेकिन बिहार ,भ्रष्टाचार से अपवित्र बना रहा। निचले स्तर से ऊपर तक एक बने सिस्टम के तहत भ्रष्टाचार की राशि पहुंचती रहती हैं ,यही कारण है की विरोधी पार्टी ,सबकुछ जानते हुये भी मौन रहती हैं अगर किसी तरह हिम्मत जुटाने की कोशिश किया तो ब्यूरोक्रेट सरकार गिराने तक धमकी देते हैं और सरकार इनके आगे नतमस्तक हो जाती हैं ।
खास सुत्रों की माने तो बिहार पुलिस को आधुनिक पुलिस की पहचान दिलाने वाले डीजीपी अभयानंद के समय भ्रष्ट ब्यूरोक्रेट के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर एक टीम गठित किया गया था। गठित टीम ने भ्रष्टाचार के खेल में शामिल सभी के खिलाफ पुख्ता सबूत इकट्ठा किया था। आधा दर्जन सीनियर आईएएस का चेहरा उजागर हो गया था। बस गिरफ्तारी होनी थी। मुख्यमंत्री तक बात पहुंच गयी । मुख्यमंत्री भी चाहते थे की कार्रवाई हो ,मौका भी था  देश में अपनी छवि को और मजबूत करने की । इसी बीच आईएएस लॉबी को कार्रवाई की भनक लग गयी । भ्रष्टाचारी ब्यूरोक्रेट ने सरकार को साफ लफजो में चेतावनी तक दे डाली की हमरा जो होगा वह बाद में पहले सरकार की चिंता तो कर ले। सरकार गिराने की पुरी रणनीति तैयार हो गयी ।बाद में सरकार बैकफुट पर आ गयी ।तत्कालीन डीजीपी अभयानंद के तेवर को ठंड कर दिया गया । आज भी फाइल में सीनियर आईएएस का करतूत बंद हैं लेकिन क्या मजाल की कोई कार्रवाई की हाथ बंटा सके ।
सरकार जीरो टॉलरेंस की बात तो करती हैं लेकिन क्या इस बात से इंकार कर सकती हैं की प्रखंड ,थाना से लेकर, एसडीओ, डीएसपी और जिले के जिलाधिकारी कार्यालय में बिना रूपये का काम हो पाता हैं । सबकुछ फिक्स्ड हैं ,ईमानदारी का जुनून अपनाया तो चक्कर पे चक्कर और कानून ,संविधान का पाठ पढ़ाया तो झूठी केस का आपको शिकार होना पड़ेगा । यही कारण हैं की समाज में आज भ्रष्टाचार का बोल-बाला है और लोकतंत्र में इनका अघोषित सत्ता चल रहा हैं ।सच तो यह हैं की नेता ब्यूरोक्रेट के बंदर हैं ,जैसे -जैसे डमरू बजाता है नेता मदारी दिखाते हैं और जनता अपने नेताओं की करते हैं जय-जय।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *